Editor - Shivangi Purohit
1मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में स्त्री चेतना का स्वर - शिवांगी पुरोहित
2अंधविश्वास : प्रेमचंद की दृष्टि में समाज की जड़ों को हिलाने वाली कुरीति- कृष्ण सिंह हाड़ा
3मुंशी प्रेमचंद : भारतीय साहित्य का यथार्थवादी शिखर- मुकेश कुमार बिस्सा
4आज भी समाज को आईना दिखाता है मुंशी प्रेमचंद का साहित्य- कृष्ण कुमार यादव
5मुंशी प्रेमचंद और स्त्री विमर्श - हर्षवर्धन वर्मा
6A Stylistic Study of Munshi Premchand's "Shroud"-. विशेष कुमार पाण्डेय
7कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'ठाकुर का कुआँ' में विविध विमर्श-प्रो. अखिलेश चन्द्र
8मुंशी प्रेमचंद द्वारा सृजित साहित्य का एक छुटपुट मूल्यांकन : भाषा व समाज के परिप्रेक्ष्य में-विंध्यवासिनी शरण श्रीवास्तव
9हृदय को आंदोलित करती प्रेमचंद की कहानियाँ -विद्या शंकर विद्यार्थी
10प्रेमचंद के साहित्य में किसान-मधुर कुलश्रेष्ठ
11अगर आज प्रेमचंद होते-अमोघ मिश्रा
12प्रेमचंद के 'सेवासदन' में स्त्री विमर्श-मुस्कान अवस्थी
13प्रेमचंद का जीवन और साहित्यिक व्यक्तित्व-विनोद मिश्र 'सुरमणि'
14प्रेमचंद के लिखे पत्रों का अध्ययन-नरेन्द्र मिश्र
15प्रेमचंद के साहित्य में श्रमिक जीवन-रश्मि शर्मा
16प्रेमचंद के कथा-साहित्य में बाल मनोविज्ञान : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन-श्वेता श्रीवास्तव
17प्रेमचंद के विचार और दर्शन : एक समीक्षात्मक अध्ययन-नवीन शर्मा
18प्रेमचंद के उपन्यासों में दलित विमर्श : सामाजिक यथार्थ, मानवीय गरिमा और परिवर्तन की चेतना-हेमेंद्र परमार 'मनु'
19समकालीन साहित्यकारों की दृष्टि में मुंशी प्रेमचंद- चेतन मिश्रा
20प्रेमचंद का हास्य और व्यंग्य- श्रीमती कमलेश दुबे
21. प्रेमचंद का कथा शिल्प और दलित अस्मिता के विविध आयाम - अवनीश कुमार तिवारी
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